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From my crying pen #3...


Tujhe is tarah paa lun,
Kuch yun savar jaaun;
Ya us chandi ki tarah me,
Har disha me bikhar jaaun...

Barish ki boond si barsun,
Yun lahar sang bah jaaun;
Ya oos ki boond jaise,
Usi patte par thahar jaun...

Teri dhoop ki chhaon banun,
Har pahlun se din sajaun;
Har taraf dhundun tujhe,
Ya tujhme hi simat jaun...

Is titli se man ki sunun,
To har rang me tere dhal jaun;
Khud apni raah par chalun,
Ya tujhe hi manzil banaun...

Teri saanson me, me jeelun,
Har khusi k liye mit jaun;
Shab dhale to intezaar karun tera,
Ya khud tere paas chali aaun...

Har baat teri maanu,
Har zid k aage jhuk jaaun;
Ye khwaab tujhe hi de dun,
Ya inhi k peechhe chhup jaun...

Har andaaz tera kardun,
Har khusi tujhme paaun;
Har dua me tujhe mangun,
Ya teri dua ban jaaun...


Comments

  1. Beautiful! Ending is superb. :)

    ReplyDelete
  2. Cutely composed... the feel of 'Deewangi of love' is coming out purely :-)

    ''Ye khwaab tujhe hi de dun,
    Ya inhi k peechhe chhup jaun...''

    Beautiful dear :)

    ReplyDelete
  3. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete

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