Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2019

वो सुर्ख़ लाल ग़ुलाब ...|

"ये रहीं ऋतिका की बुक्स और पेंसिल बॉक्स | और कुछ तो नहीं रह गया ?"
"टेलर के यहाँ से जो आप कुर्ता पिछले सप्ताह लाने वाले थे ... "
"अरे यार स्वाति...सो सॉरी मैं कल पक्का... "
"अरे बाबा मैं वो कुर्ता ले आई | डोंट वरि | "
"तुम भी ना स्वाति | ऋतिका बेटा, यहाँ आइये और अपना सामान ले जा कर अंदर रखिये | "
ऋतिका भागते हुए आई, "थैंक यू पापा | दादी दादी देखो मेरा नया पेंसिल बॉक्स... " कहती हुई दादी के कमरे में वापस चली गई |

"जब से माँ आई हैं ये बस उन्ही के कमरे में रहती है न ? "
"हाँ, कम से कम मेरा सर नहीं खाती अब दिन भर, सवाल पूछ-पूछ कर | "
"हाहाहाहा। ... अरे माँ ! आइये बैठिये न | "
"उदय, बेटा  मैंने तुझसे एक गुलाब मंगवाया था वो नहीं लाया तू? "
"माँ मैं बिलकुल भूल गया, कल ले आऊंगा | पक्का | वैसे आपको चाहिए क्यों गुलाब का फूल? पूजा के लिए और भी फूल लगे हैं हमारी बालकनी में | "
"नहीं पूजा के लिए नहीं बालों में लगाने के लिए | " इतना कहकर माँ वापस अपने कमरे में चली गई |

मैं और स्…