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An inevitable transition...!

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I was in school, when this one time my nanaji and my father both were extremely sick. Being from a middle class family, I have never witnessed any public display of affection between my parents. They only used to talk about the ration, bills and our school fees. The whole situation unknowingly convinced me that my mother did not love my father or his side of family. On the other hand, nanaji was mother’s best friend. They always stayed updated with each other’s life even in the postcard era.   Despite of sharing a stronger bond with her father, mother decided to stay with her husband instead. I clearly remember mentoring my brain for the possibility that I might had to take care of papa. But when she didn't leave. I questioned her, “why?” To which she immediately replied, “Because this is my home and my priorities lies here. You will understand when you will grow older.” Strange! I thought.   I am older now and have been married since last 3 years yet I did not find the answer to m

Loneliness...We are together in that too...!

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“So now, all alone or not, you gotta walk ahead. Thing to remember is if we're all alone, then we're all together in that too.”  — Patricia , P.S I Love You  One of my most favorite lines ever written. Midlife crisis! A troublesome phase no one is waiting for. I mean teenage is chaotic, yet everyone waits for it. On the other hand, a good percentage of people don't even know about the midlife crisis. When I first heard this term, I had imagined how my own version would look like. I thought I might be struggling with my job, family planning, existential crisis, confused between writing and improving technically. But what I'm struggling with, is something I never thought I will. The loneliness. Yeah, the melodramatic loneliness. Obviously, I have people around me yet this absurd feeling is eating me up. Anyways, if I speak about this to someone, they will say I'm overthinking. And I understand their view. What we are missing in this p

The story of two phonecalls...!

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This post is part of 'I will #ShareTheLoad and help in household chores in association with Ariel India and BlogAdda ‘ "Pranam Papa!" "Bless you my ladoo! Everything alright? You are calling at an unusual time." "Yes papa everything good, actually it's great." "Ooh, you sound different, what's new?" "Papa actually something strangely lovely happened yesterday. I was up late, the night before yesterday to finish some office work, so I woke up at 10 the next morning." "10? So late?" "Yes papa, and when I saw the time, I panicked and rushed to the kitchen and what I saw was unbelievable." "Ooh what was it?" "I was hoping for a mess but instead, everything was clean and done. Utensils, all clean and arranged, sweeping-mopping done, bedsheets and towels I left in the washing machine were drying in the balcony. And on top of that, there was Upma for breakfast." "O wow! Rea

एक आम सी शाम ...!

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हर शाम की तरह एक आम सी शाम है। शर्मा जी , मिश्रा जी , खान साहब और कांट्रेक्टर बाबू अपनी-अपनी बालकनी में चाय लेकर पहुँच चुके थे। अजी ये कोरोना के चलते अब यूँही दूर-दूर से चाय पीने का दस्तूर ही आम दिनचर्या का हिस्सा बन चूका है। साथ बैठकर चाय पिए तो शायद आरसे बीत गए हैं।  पर जब आप इस कहानी को पड़ें तो याद रखें, यह हमारे छोटे शहरों के अपार्टमेंट नहीं, जहाँ फ्लैट के अंदर ही फोर व्हीलर पार्किंग और गार्डन भी होता है । यह मुंबई के अपार्टमेंट हैं, यहाँ अपने-अपने घरों में रहकर भी आराम से बात हो सकती है। आमने-सामने के फ्लैट में दूरी कितनी ? बस २ गज़। तभी मोदी जी ने २ गज़ दूरी तय की है सोशल डिस्टैन्सिंग के लिए , वरना मुम्बइकर्स को एक फ्लैट छोड़ एक में शिफ्ट होना पड़ता।  खैर, आम तौर पर रोज़ चाय पर चर्चा शुरू करने वाले शर्मा जी आज ज़रा चुप हैं । "क्या हुआ शर्मा जी ? ये बिना मुद्दे के विपक्ष जैसी शक्ल क्यूँ बनाई हुई है ?" उनके बगल वाले फ्लैट में रहने वाले मिश्रा जी ने पूछा। "परसों जो आपसे चाय का कप टूटा था, वो पता चल गया क्या भाभी जी को? " मिश्रा जी के सामने रहने वाले खान साह

बचपन की पोटरी: किस्सा पहले ऑपरेशन का ...!

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"मम्मी दर्द तो नहीं होगा ना ? पापा-पापा दर्द तो नहीं होगा ना ?" 10th के एक्साम्स के बाद मेरी एक छोटी सी सर्जरी होनी थी जिसके लिए मैं, मम्मी और पापा हॉस्पिटल आये थे। हॉस्पिटल वही सरकारी वाला। एक छोटे से शहर के छोटे से सरकारी हॉस्पिटल से, वो भी 2007 में आप क्या ही उम्मीद करेंगे। कहाँ OPD कहाँ ICU  कहाँ Emergency कुछ नहीं पता। सारे पेशेंट्स एक ही हाल में बस अपने नाम बोले जाने का इंतज़ार कर रहे थे।  क्यूंकि ये मेरी पहली सर्जरी थी (इसके बाद कई मौके दिए ऊपर वाले ने OT में जाने के ), मैं बहुत बुरी तरह से डरी हुई थी। हालत एकदम कसाई के बकरे जैसी थी। पता है कटने वाला है फिर भी भाग नहीं सकता। मैंने उस दिन दूध वाले भैया से , काम वाली आंटी से , नर्स से और बगल में बैठी एक बूढ़ी दादी से ये पूछकर कन्फर्म कर लिया था के दर्द नहीं होगा। पर फिर भी हर १० मिनट् बाद मेरा अलार्म बज जाता और मैं "मम्मी दर्द तो नहीं होगा ना ? पापा दर्द तो नहीं होगा ना ?" शुरू हो जाती।  इंतज़ार करते करते हमे करीब 40 मिनट हो चुके थे और मेरा अलाप वापस शुरू होने ही वाला था कि अचानक हॉल में हल-चल बड़ गई। कु

खाना बनाना आता है ?

"लीजिये ना बहनजी, समोसे एकदम गरम हैं ! " 70 किलो की श्रीमती आशा जी जिन्होंने 30 किलो के गहने और साड़ी पहनी हुई थी, मनोज जी के विनम्र अनुग्रह पर, बड़ी बारीकी से देखकर सबसे बड़ा समोसा हाँथ में ले लेती हैं। समोसे का स्वाद लेते हुए उनके चेहरे पर सवाल आया ही था कि, श्रीमती विमला जी एक और नास्ते से  ट्रे रखते हुए बोली, "ये सारा नास्ता साक्षी ने खुद जोमाटो से आर्डर करा है। बहुत तेज़ है हमारी बिटिया। कोई भी ऍप या टेक्नोलॉजी फट से सीख लेती है। लीजिये ना लड्डू लीजिये , शुद्ध घी के हैं। " "जी मैंने कंप्यूटर साइंस से M Tech करा है, मां बस ऐसे ही छोटी छोटी छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ा कर बोल रहीं हैं।  आज कल ये हर कोई कर लेता है। " "सही कहा अपने। " रोहित ने तुरंत ताल में ताल मिला दी। रोहित एक बड़ी कंपनी में मैनेजमेंट की किसी पोस्ट पर विदेश में काम करता है। अच्छे कॉलेज से MBA करने के तुरंत बाद ही वो देश के बहार चला गया था। आज अपनी माँ और पिता जी की साथ साक्षी को शादी के लिए देखने आया है। "वैसे इंटरेस्ट क्या हैं आपके ? मैंने सोशल मीडिया पर आपका प्रोफाइल द