खाना बनाना आता है ?

"लीजिये ना बहनजी, समोसे एकदम गरम हैं ! "

70 किलो की श्रीमती आशा जी जिन्होंने 30 किलो के गहने और साड़ी पहनी हुई थी, मनोज जी के विनम्र अनुग्रह पर, बड़ी बारीकी से देखकर सबसे बड़ा समोसा हाँथ में ले लेती हैं।

समोसे का स्वाद लेते हुए उनके चेहरे पर सवाल आया ही था कि, श्रीमती विमला जी एक और नास्ते से  ट्रे रखते हुए बोली, "ये सारा नास्ता साक्षी ने खुद जोमाटो से आर्डर करा है। बहुत तेज़ है हमारी बिटिया। कोई भी ऍप या टेक्नोलॉजी फट से सीख लेती है। लीजिये ना लड्डू लीजिये , शुद्ध घी के हैं। "

"जी मैंने कंप्यूटर साइंस से M Tech करा है, मां बस ऐसे ही छोटी छोटी छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ा कर बोल रहीं हैं।  आज कल ये हर कोई कर लेता है। "

"सही कहा अपने। " रोहित ने तुरंत ताल में ताल मिला दी।

रोहित एक बड़ी कंपनी में मैनेजमेंट की किसी पोस्ट पर विदेश में काम करता है। अच्छे कॉलेज से MBA करने के तुरंत बाद ही वो देश के बहार चला गया था। आज अपनी माँ और पिता जी की साथ साक्षी को शादी के लिए देखने आया है।

"वैसे इंटरेस्ट क्या हैं आपके ? मैंने सोशल मीडिया पर आपका प्रोफाइल देखा है लगता है घूमना बहुत पसंद है आपको ?"

रोहित कुछ और पूछता उसकी माँ ने उसे आँखें दिखा कर चुप करा दिया।

"जी। मुझे लिखना, डांस करना, और क्राफ्ट्स का भी बहुत शौक है। मैंने आपकी प्रोफाइल भी देखी है और शायद आपको भी डांस का बहुत शौक है। "

 रोहित ने माँ के डर से कुछ ना कहते हुए सिर्फ हाँ में सर हिला दिया। पर उसके चेहरे से साफ़ समझ आ रहा था के वो साक्षी से काफी इम्प्रेस्सेड है। आखिर काफी पड़ी लिखी है, अच्छी कंपनी में अच्छी पोस्ट पर है और दुसरे शौक भी हैं। उसे आने वाली ज़िन्दगी एडवेंचर से भरी हुई साफ़ नज़र आ रही थी।

लड़के के पिता वहां सिर्फ घर के बड़े होने के कारण मौजूद थे। वो ना कुछ पूछने की इस्थिति में थे ना अपना पक्ष रखने की। इसलिए बस हर प्लेट से थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ उठाकर अपने मूह में रख लेते थे।

"साक्षी हमारी बहार के कामों में भी एकदम एक्सपर्ट है। कोई ऐसा काम नहीं जिसके लिए साक्षी कभी बोली हो के पापा ये काम लड़कियां नहीं करती , छोटू से कराइये। " इस बात पर सभी ठहाका देकर हंस दिए।

करीब 30 मिनट और इसी तरह साक्षी के अलग अलग गुणों का वखान चलता रहा। रोहित अब पूरी तरह से साक्षी के साथ अपना जीवन मन ही मन में चित्रित कर चूका था। पर एक बात सबको अंदर ही अंदर खाये जा रही थी के आशा जी ने अभी तक कोई सवाल नहीं पूछा।

"आशा जी आप भी कुछ बोलिये न , आपके मन में भी तो सवाल होंगे। " अंततः साक्षी की माँ ने कहा।

आशा जी ने पानी के २ घूँट पीते हुए कहा "बेटा खाने में क्या क्या बना लेती हो ?"

"आंटी मैं बना तो पूरा खाना लेती हूँ पर मुझे खाना बनाना पसंद नहीं , इसलिए मेड लगाई हुई है, और फिर जॉब की वजह से टाइम भी नहीं मिल पाता। "

"तो शादी के बाद किस तरह मैनेज करेंगे आप दोनों ?"

"मेड लगा लेंगे माँ। "  रोहित ने तुरंत जवाब दिया।

रोहित के इस जवाब ने साक्षी का दिल जीत लिया और दोनों की मुस्कुराहट से पता चल रहा था कि इन दोनों का जवाब हाँ है।

आज ठीक 3 महीने बाद रोहित की शादी आकांक्षा से हो रही है, जो जॉब नहीं करती इसलिए रोहित को दोनों टाइम अपने हाँथ का गरम गरम खाना बनाकर खिला सकती है |

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